श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)

नाम : श्रवणबेलगोला
पता : श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, श्रवणबेलगोला , ग्राम – श्रवणबेलगोला, तह. – चन्द्रराय पट्टन, जिला – हासन ( कर्नाटक ) पिन - 573135
टेलीफोन : 08176-257226, 257258, 257293, 257224 फैक्स : 257281
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं :
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आवास |
कमरे (अटैच बाथरूम) – 120 |
कमरे (बिना बाथरूम) – 10 |
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हाल - 5 एवं कमरे – 363, |
गेस्टहाउस – 12 |
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यात्री ठहराने कि कुल क्षमता – 2000 |
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भोजनालय |
नि:शुल्क, नियमित |
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औषधॉलय |
है |
पुस्तकालय |
है |
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विद्यालय |
है |
एस.टी.डी. / पी.सी.ओ. |
है |
आवगमन के साधन :
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रेलवे स्टेशन |
हासन – 52
कि.मी., बेंगलौर -150 कि.मी., श्रवणबेलगोला – 2 कि.मी. |
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बस स्टैंड |
श्रवणबेलगोला |
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पहुँचने का सरलतम मार्ग |
बेंगलौर, मैसूर, हासन आदि स्थानों से सड़क मार्ग द्वारा |
निकटतम प्रमुख नगर :
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मैसूर – 85 कि.मी., बेंगलौर – 146 कि.मी. |
प्रबन्ध व्यवस्था :
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संस्था |
SDJMI मैनेजिंग कमेटी |
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अध्यक्ष |
स्वस्तिश्री चारूकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी |
क्षेत्र का महत्व :
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क्षेत्र पर मंदिरों की संख्या |
पर्वत, तलहटी व ग्राम में अनेक जिनालय |
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क्षेत्र पर पहाड़ |
2 पहाड़ – विन्ध्यगिरि पर 644 एवं चन्द्रगिरि
पर 175 सीढ़ियाँ है | डोली की व्यवस्था है | |
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ऐतिहासिकता |
एक हजार वर्ष से भी अधिक पूर्व 981 ई. में
महामात्य चामुण्डरायजी ने आचार्य श्री नेमिचन्द्र सिद्धांत चक्रवर्ती के
सान्निध्य में इन्द्रगिरी पर्वत पर भगवान बाहुबली कि प्रतिमा प्रतिष्ठित कराई थी
| यह मूर्ति लगभग 18 मीटर ( 58 फीट ) ऊँची, उत्तरमुखी, खड्गासन, संसार की अनुपम,
अदिृतीय एवं अतिशय सम्पन्न विशाल प्रतिमा है | इस भव्य मूर्ति का महामस्तकाभिषेक
12 वर्षो के अंतराल से होता है | यह दक्षिण भारत का प्रमुख जैन तीर्थ व पर्यटन
स्थल है | चंद्रगिरी पर्वत पर अनेक प्राचीन मन्दिर एवं बहुमूल्य शिलालेख है
जिनसे प्राचीन जैन इतिहास पर प्रकाश पड़ता है | लगभग 15-16 कि.मी. की दूरी से यह
मूर्ति दृष्टीगोचर होती है | लगभग 500 शिलालेख जैनों कि गौरव गाथा का उल्लेख
करते है | श्री भट्टारक चारूकीर्तिजी का निवास जैन मठ है | |
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र :
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धर्मस्थल – 180 कि.मी., वेणूर – 180 कि.मी., मूडबिद्री –
200 कि.मी., कारकल – 225 कि.मी., हूँमचा – 200 कि.मी. |
