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Audichya Brahman Samaj

नैनागिरि ( रेशंदीगिरि ) (मध्यप्रदेश)

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं :

आवास

कमरे (अटैच बाथरूम) 30

कमरे (बिना बाथरूम) 50

 

हाल 7, (यात्री क्षमता 500),

गेस्टहाउस नहीं

 

यात्री ठहराने कि कुल क्षमता 1000

भोजनालय

शुल्क, नियमित

औषधॉलय

नहीं

पुस्तकालय

है, पुस्तकें – 6000 एवं नियमित पत्रिकाएँ - 5

विद्यालय

है ( व्रती / वृदाश्रम, छात्रावास भी है )

एस.टी.डी. / पी.सी..

है

आवगमन के साधन :

रेलवे स्टेशन

सागर – 55 कि.मी.

बस स्टैंड

दलपतपुर – 13 कि.मी., कटनी – दमोह से होकर व्हाया

पहुँचने का सरलतम मार्ग

सागर, टीकमगढ, छतरपुर से सड़क मार्ग | सागर – बकस्वाहा, राष्ट्रिय राजमार्ग क्र. 86 पर स्थित दलपतपुर ग्राम से 13 कि.मी.

निकटतम प्रमुख नगर :

दलपतपुर – 13 कि.मी., बण्डा (वेलई) – 25 कि.मी., बकस्वाहा – 26 कि.मी., शाहगढ़ – 40 कि.मी.

प्रबन्ध व्यवस्था :

संस्था

श्री दिग. जैन सिद्धक्षेत्र रेशंदगिरि नैनागिरि प्रबन्ध एवं ट्रस्ट समिति

अध्यक्ष

श्री डेवडिया रघुवर प्रसादजी, शाहगढ़  ( 07583 – 259337 )

मंत्री

श्री सेठ दामोदरजी जैन, शाहगढ़ (07583 – 259344, 259225)

प्रबन्धक

श्री आशीष जैन, शिखरचंद जैन, नैनागिरि (07583 - 280095)

क्षेत्र का महत्व :

क्षेत्र पर मंदिरों की संख्या

53

क्षेत्र पर पहाड़

पहाड़ी पर 50 सीढियाँ हैं |

ऐतिहासिकता

लगभग 2900 वर्ष पूर्व भगवान पार्श्वनाथ का समवशरण यह आया था, साथ ही पंच ऋषिराजों ने यह से मोक्ष प्राप्त किया | खुदाई करने पर 13 जिन प्रतिमाओं से युक्त मन्दिर प्राप्त हुए थे | सर्वाधिक प्राचीन जिनालय ई. सन् 1042 का हैं | सन् 1955 – 56 में चौबीसी जिनालय की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं 1987 में पार्श्वनाथ समवशरण जिनालय की प्रतिष्ठा हुई | यहाँ 38 मन्दिर पहाड़ी पर, 13 मन्दिर तलहटी में, 2 मन्दिर पारस सरोवर में स्थित हैं |

वार्षिक मेला

अगहन शुक्ल तेरस से पूर्णिमा तक वार्षिक मेला लगता हैं | इसके अलावा वर्ष में दो दिन विशेष कार्यक्रम होते हैं – सावन सुदी 7 श्री पार्श्वनाथ निर्वाण दिवस, कार्तिक वदी अमावस – भगवान महावीर निर्वाण दिवस |    

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र :

द्रोणागिरि – 80 कि.मी., पपौराजी – 102 कि.मी., अहारजी – 115 कि.मी., कुण्डलपुर -120 कि.मी., खजुराहो – 168 कि.मी.