मंगीतुंगी जी (महाराष्ट्र)

नाम : मंगीतुंगी जी
पता : श्री मंगीतुंगीजी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, मंगीतुंगीजी, मु.पो. – मंगीतुंगी, तहसील – सटाणा, जिला – नासिक (महाराष्ट्र) पिन – 423 302
टेलीफोन : 02555-242519, 286531, मो. : 094227-54603, 075887-11766 email – mangitungi.1008@gmail.com
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं :
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आवास |
कमरे (अटैच बाथरूम) – 55 |
कमरे (बिना बाथरूम) – 40 |
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हाल – 5 (यात्री क्षमता - 150) |
गेस्ट हाउस – 4 |
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यात्री ठहराने कि कुल क्षमता – 1000 |
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भोजनालय |
है, सशुल्क |
पुस्तकालय |
है |
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औषधॉलय |
है |
एस.टी.डी. / पी.सी.ओ. |
है |
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विद्यालय |
नहीं |
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आवगमन के साधन :
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रेलवे स्टेशन |
मनमाड़ – 100 कि.मी. |
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बस स्टैंड |
ताहराबाद – 11 कि.मी. |
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पहुँचने का सरलतम मार्ग |
मनमाड़, मालेगांव, नासिक, धुलिया से बस द्वारा |
निकटतम प्रमुख नगर :
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मनमाड़ - 100 कि.मी., मालेगांव – 65 कि.मी.,
नासिक – 125 कि.मी., धुलिया – 100 कि.मी. |
प्रबन्ध व्यवस्था :
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संस्था |
श्री मंगीतुंगीजी दि. जैन सिद्धक्षेत्र ट्रस्ट |
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अध्यक्ष |
श्री रमेश हुकुमचन्दजी गंगवाल, इंदौर (098932-09074) |
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महामंत्री |
श्री अनिल श्रीचन्द जैन, पारोला (02597-223248, 09403904661) |
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कोषाध्यक्ष |
श्री मोहन सोनालाल जैन (आर.टी.ओ.) कुसुंबा (9422264486) |
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प्रबंधक |
डॉ. सूरजमल गणेशलाल जैन, मंगीतुंगीजी (02555-219108, 09422754603) |
क्षेत्र का महत्व :
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क्षेत्र पर मंदिरों की संख्या |
21 |
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क्षेत्र पर पहाड़ |
है (मंगीजी एवं तुंगीजी, 3500 सीढ़ियाँ है, डोली उपलब्ध है) |
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ऐतिहासिकता |
यह क्षत्र दक्षिण भारत का
सम्मेदशिखर कहलाता है | यहाँ से श्रीराम, हनुमान, सुग्रीव, सुडील, नील, महानील
सहित 99 करोड़ मुनिराज मोक्ष गये | सीताजी यहीं से स्त्रीलिंग छेदकर 16 वें
स्वर्ग में प्रतिइन्द्र हुई | श्रीकृष्णजी की मृत्यु एवं अग्नि संस्कार भी यही हुआ
| परमपूज्य, गणिनीप्रमुख, आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से
पहाड़ पर भगवान ऋषभदेव की विश्व में विशालतम 108 फीट ऊँची मूर्ति का निर्माण हो
रहा है | मांगीजी पर 9 मंदिर व तुंगीजी पर 4 मंदिर है | तलहटी पर 7 मंदिर है
जिनमे 1083 मूर्तियाँ है | 1008 विश्व हितंकर सातिशय चिन्तामणि पार्श्वनाथ की
चमत्कारिक प्रतिमा है | लोगों की मान्यता है की दर्शन करने से लाभ मिलता है |
शनि अमावस्या के दिन महामस्तकाभिषेक होता है | शनि का प्रकोप दूर होता है | |
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वार्षिक मेला |
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा (दीपावली के पश्चात्) |
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र :
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गजपंथा – 125 कि.मी., महुवा – 175 कि.मी.,
एलोरा – 180 कि.मी., कचनेर – 250 कि.मी., पैठण – 250 कि.मी. |
