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Audichya Brahman Samaj

मंगीतुंगी जी (महाराष्ट्र)

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं :

आवास

कमरे (अटैच बाथरूम) 55

कमरे (बिना बाथरूम) 40

 

हाल 5 (यात्री क्षमता - 150)

 गेस्ट हाउस 4

 

यात्री ठहराने कि कुल क्षमता 1000

भोजनालय

है, सशुल्क         

पुस्तकालय

है

औषधॉलय

है

एस.टी.डी. / पी.सी..

है

विद्यालय

नहीं

आवगमन के साधन :

रेलवे स्टेशन

मनमाड़ – 100 कि.मी.

बस स्टैंड

ताहराबाद – 11 कि.मी.

पहुँचने का सरलतम मार्ग

मनमाड़, मालेगांव, नासिक, धुलिया से बस द्वारा

निकटतम प्रमुख नगर :

मनमाड़ - 100 कि.मी., मालेगांव – 65 कि.मी., नासिक – 125 कि.मी., धुलिया – 100 कि.मी.     

प्रबन्ध व्यवस्था :

संस्था

श्री मंगीतुंगीजी दि. जैन सिद्धक्षेत्र ट्रस्ट                        

अध्यक्ष

श्री रमेश हुकुमचन्दजी गंगवाल, इंदौर (098932-09074)

महामंत्री

श्री अनिल श्रीचन्द जैन, पारोला (02597-223248, 09403904661)

कोषाध्यक्ष

श्री मोहन सोनालाल जैन (आर.टी.ओ.) कुसुंबा (9422264486)

प्रबंधक

डॉ. सूरजमल गणेशलाल जैन, मंगीतुंगीजी (02555-219108, 09422754603)

क्षेत्र का महत्व :

क्षेत्र पर मंदिरों की संख्या

21

क्षेत्र पर पहाड़

है (मंगीजी एवं तुंगीजी, 3500 सीढ़ियाँ है, डोली उपलब्ध है)

ऐतिहासिकता

यह क्षत्र दक्षिण भारत का सम्मेदशिखर कहलाता है | यहाँ से श्रीराम, हनुमान, सुग्रीव, सुडील, नील, महानील सहित 99 करोड़ मुनिराज मोक्ष गये | सीताजी यहीं से स्त्रीलिंग छेदकर 16 वें स्वर्ग में प्रतिइन्द्र हुई | श्रीकृष्णजी की मृत्यु एवं अग्नि संस्कार भी यही हुआ | परमपूज्य, गणिनीप्रमुख, आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से पहाड़ पर भगवान ऋषभदेव की विश्व में विशालतम 108 फीट ऊँची मूर्ति का निर्माण हो रहा है | मांगीजी पर 9 मंदिर व तुंगीजी पर 4 मंदिर है | तलहटी पर 7 मंदिर है जिनमे 1083 मूर्तियाँ है | 1008 विश्व हितंकर सातिशय चिन्तामणि पार्श्वनाथ की चमत्कारिक प्रतिमा है | लोगों की मान्यता है की दर्शन करने से लाभ मिलता है | शनि अमावस्या के दिन महामस्तकाभिषेक होता है | शनि का प्रकोप दूर होता है |

वार्षिक मेला

कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा (दीपावली के पश्चात्)

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र :

गजपंथा – 125 कि.मी., महुवा – 175 कि.मी., एलोरा – 180 कि.मी., कचनेर – 250 कि.मी., पैठण – 250 कि.मी.