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Audichya Brahman Samaj

कनकगिरी (कर्नाटक)

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं :

आवास

नि:शुल्क निवास एवं कमरे (अटैच बाथरूम) – 25

कमरे (बिना बाथरूम) – 10

 

हाल – 3 (यात्री क्षमता – 100+50+50)

गेस्ट हाउस – 4

 

यात्री ठहराने कि कुल क्षमता – 400

भोजनालय

है, नि:शुल्क,नियमित   

औषधॉलय

है

पुस्तकालय

पुस्तकें– 5000, शास्त्र–100

विद्यालय

स्कूल/कॉलेज/आश्रम

एस.टी.डी. / पी.सी.ओ.

है

आवगमन के साधन :

रेलवे स्टेशन

कवलन्दे – 10 कि.मी., मैसूर – 52 कि.मी.

बस स्टैंड

स्वस्ति श्री भट्टारक भुवनकीर्ति महा. (08226-296809)

पहुँचने का सरलतम मार्ग

नंजनगूड ( ऊटी हाईवे ) से 25 कि.मी., चामराजनगर या कोयम्बतूर मार्ग से 1 कि.मी.

निकटतम प्रमुख नगर :

मैसूर शहर – 52 कि.मी., मैसूर- ऊटी के मध्य नंजनगूड शहर -25 कि.मी., हरवे – 4 कि.मी., मूगूर- 50 कि.मी., उम्मद्तूर- 35 कि.मी., कुदेरू-2 कि.मी., तगडूर- 20 कि.मी.

प्रबन्ध व्यवस्था :

संस्था

श्री दिगम्बर जैन मठ, कनकगिरी

अध्यक्ष

श्री बसंतराव चिंतामणी कुलकर्णी, गुलबर्गा

मंत्री

श्री आर.के.जैन, मुम्बई (022-22184737)

प्रबंधक

श्री मेघराज जैन

क्षेत्र का महत्व :

क्षेत्र पर मंदिरों की संख्या

3 (24 चरण – प्रत्येक नसियाऐं)

क्षेत्र पर पहाड़

है, 350 सीढ़ियाँ है वाहन ऊपर तक जा सकते है |

ऐतिहासिकता

कनकगिरि या कनकाद्री के नाम से जाना जाता है | आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी की तपोभूमि एवं समाधी क्षेत्र, कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु राज्यों कि सीमा पर स्थित मेलयूर गाँव में स्थित है | भगवान महावीर का विहार यहाँ हुआ था |  कर्नाटक राज्य के मैसूर नगर से 50 कि.मी की दूरी पर स्थित मनोरम शिलाखंडो का पर्वत सूर्यपुर के महान तपोनिधि सुप्रतिष्ठ महामुनि ने घोरतप साधना के फलस्वरूप केवल ज्ञान स्थल है | यह ज्ञानचंद मुनि की मोक्ष स्थली है | जैन मुनि तपस्वियों के साधनों की सल्लेखना विधिपूर्वक समाधी के बारे में 27 से भी अधिक शिलालेख है | चौबीस तीर्थकरों के चरण स्थापित, टोंके भी निर्मित है | 

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र :

श्रवणबेलगोला, चन्द्रनाथगिरि, वेनाडू (केरल) केलसूरा आ.वीरसेन स्वामी – घवला के अमूल्य ग्रंथो के रचयिता की तपोभूमि – श्री दिग. जैन मठ भी है | प्राचीन तीर्थक्षेत्र है, अनेक जैनाचार्यों कि समाधि स्थली है |