राजगिरजी (बिहार)

नाम : राजगिरजी
पता : श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, राजगिर, पोस्ट - राजगिर, जिला – नालंदा (बिहार) पिन – 803 116
टेलीफोन : 06112-255235, 255783, (093347-70317)
क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं :
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आवास |
कमरे (अटैच बाथरूम) - 50 |
कमरे (बिना बाथरूम) – 60 |
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हाल – 2 (यात्री क्षमता -
55) |
गेस्टहाउस – नहीं |
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यात्री ठहराने कि कुल
क्षमता – 1000 |
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भोजनालय |
नियमित,सशुल्क |
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औषधॉलय |
है (आयुर्वेदिक) |
पुस्तकालय |
है |
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विद्यालय |
नहीं |
एस.टी.डी. / पी.सी.ओ. |
है |
आवगमन के साधन :
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रेलवे स्टेशन |
राजगिर – 1 कि.मी. |
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बस स्टैंड |
राजगिर |
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पहुँचने का सरलतम मार्ग |
गया या पटना से
रेल द्वारा, राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 31 से नवादा, हिसुआ या बिहारशरीफ होकर सड़क
मार्ग से |
निकटतम प्रमुख नगर :
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बिहारशरीफ – 22 कि.मी.,
गया – 65 कि.मी., पटना – 100 कि.मी. |
प्रबन्ध व्यवस्था :
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संस्था |
श्री दिगम्बर जैन
सिद्धक्षेत्र राजगिर (बिहार प्रान्त तीर्थक्षेत्र कमेटी), देवाश्रम – महादेवा
रोड, आरा |
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अध्यक्ष |
साहू श्री
शरदकुमार जैन, मुम्बई (022-22871914) |
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मंत्री |
श्री अजयकुमार जैन, पटना
(09334396920) |
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प्रबंधक |
श्री सरोजकुमार जैन (06112-255235, 098356-20074) |
क्षेत्र का महत्व :
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क्षेत्र पर मंदिरों की
संख्या |
12
(पहाड़ पर 10, तलहटी पर 2) |
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क्षेत्र पर पहाड़ |
है (कुल 4189 सीढ़ियाँ, 5
पहाड़ है) |
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ऐतिहासिकता |
यह भगवान
मुनिसुव्रतनाथजी के गर्भ, जन्म, तप एवं ज्ञान कल्याणक हुए हैं, अतः जन्मभूमि है
| यह भगवान महावीर की प्रथम (देशना) स्थली है | यहाँ स्थित विपुलाचल, रत्नगिरि,
उदयगिरि, अरुणगिरि (स्वर्णगिरि) व वैभवगिरि आदि पाँच पहाडियों से अनेक मुनियों
ने निर्वाण प्राप्त किया, इसलिये इसे सिद्धक्षेत्र माना गया है | लाल मंदिर के
प्रांगण में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से भगवान
मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा कमलासनपर विराजमान की गई है| |
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विशेष जानकारी |
राजगिर जैन
धर्मं के अतिरिक्त हिन्दू, मुस्लमान, सिख, ईसाई एवं बौद्ध धर्मो का संगम स्थल है
| प्रकृति प्रदत्त गर्म जल के झरने यहाँ के विशेष आकर्षण है | अन्तर्राष्ट्रीय
पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है | |
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र :
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कुण्डलपुर – 15
कि.मी., पावापुरी – 35 कि.मी., गुणावाँजी - 40 कि.मी., गुलजारबाग (पटना) - 100
कि.मी. |
