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Audichya Brahman Samaj

राजगिरजी (बिहार)

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं :

आवास

कमरे (अटैच बाथरूम) - 50

कमरे (बिना बाथरूम) – 60

 

हाल – 2 (यात्री क्षमता - 55)

गेस्टहाउस – नहीं

 

यात्री ठहराने कि कुल क्षमता – 1000

भोजनालय

नियमित,सशुल्क

औषधॉलय

है (आयुर्वेदिक)

पुस्तकालय

है

विद्यालय

नहीं

एस.टी.डी. / पी.सी.ओ.

है

आवगमन के साधन :

रेलवे स्टेशन

राजगिर1 कि.मी.

बस स्टैंड

राजगिर

पहुँचने का सरलतम मार्ग

गया या पटना से रेल द्वारा, राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 31 से नवादा, हिसुआ या बिहारशरीफ होकर सड़क मार्ग से

निकटतम प्रमुख नगर :

बिहारशरीफ – 22 कि.मी., गया – 65 कि.मी., पटना – 100 कि.मी.

प्रबन्ध व्यवस्था :

संस्था

श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र राजगिर (बिहार प्रान्त तीर्थक्षेत्र कमेटी), देवाश्रम – महादेवा रोड, आरा

अध्यक्ष

साहू श्री शरदकुमार जैन, मुम्बई (022-22871914)

मंत्री

श्री अजयकुमार जैन, पटना (09334396920) 

प्रबंधक

श्री सरोजकुमार जैन (06112-255235, 098356-20074)

क्षेत्र का महत्व :

क्षेत्र पर मंदिरों की संख्या

12 (पहाड़ पर 10, तलहटी पर 2)

क्षेत्र पर पहाड़

है (कुल 4189 सीढ़ियाँ, 5 पहाड़ है)

ऐतिहासिकता

यह भगवान मुनिसुव्रतनाथजी के गर्भ, जन्म, तप एवं ज्ञान कल्याणक हुए हैं, अतः जन्मभूमि है | यह भगवान महावीर की प्रथम (देशना) स्थली है | यहाँ स्थित विपुलाचल, रत्नगिरि, उदयगिरि, अरुणगिरि (स्वर्णगिरि) व वैभवगिरि आदि पाँच पहाडियों से अनेक मुनियों ने निर्वाण प्राप्त किया, इसलिये इसे सिद्धक्षेत्र माना गया है | लाल मंदिर के प्रांगण में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा कमलासनपर विराजमान की गई है|

विशेष जानकारी

राजगिर जैन धर्मं के अतिरिक्त हिन्दू, मुस्लमान, सिख, ईसाई एवं बौद्ध धर्मो का संगम स्थल है | प्रकृति प्रदत्त गर्म जल के झरने यहाँ के विशेष आकर्षण है | अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है |

समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र :

कुण्डलपुर – 15 कि.मी., पावापुरी – 35 कि.मी., गुणावाँजी - 40 कि.मी., गुलजारबाग (पटना) - 100 कि.मी.